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Wednesday, April 10, 2013

तोरा मन दर्पण कहलाये

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय

तोरा मन दर्पण कहलाये मेरे अनुभव मेरे हैं---और आपके अनुभव आपके रहेंगे----इनमें कम या अधिक अंतर हो सकता है---यहाँ इन्हें पूरी ईमानदारी से प्रस्तुत किया जायेगा तांकि मन की दुनिया के राज़ हम सब बाँट सकें----श्री गुरुनानक देव जी ने कहा था---मन जीते जगजीत----बस यह ब्लॉग इसी मकसद की याद दिलाता रहे इसका हर सम्भव प्रयास रहेगा---कार्तिका सिंह 
प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ तोहे
प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे

तोरा मन दर्पण कहलाये \- २
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये
तोरा मन दर्पण कहलाये \- २

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये \- २

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार
मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार
जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये \- २

तन की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटि मेइन रौंद
मन की क़दर भुलानेवाला वीराँ जनम गवाये
तोरा मन दर्पण कहलाये \- २